हुकमचंद मिल के मजदूर अब करेंगे सड़क पर आंदोलन

इंदौर। हुकमचंद मिल के मजदूर अब सड़क पर करेंगे आंदोलन। हुकमचंद मिल के मजदूर 30 साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है। अब मजदूर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। मजदूरों का कहना है कि उन्हें मिल की जमीन से कोई लेना-देना नहीं है। वे तो सिर्फ यही चाहते हैं कि उन्हें उनके हक का पैसा दिला दिया जाए। साप्ताहिक बैठक में मजदूरों ने आंदोलन की रणनीति पर विचार किया।

मजदूर नेता हरनामसिंह धालीवाल के मुताबिक छह अगस्त 2007 को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मजदूरों के पक्ष में फैसले देते हुए सरकार को आदेश दिया था, कि वह मिल की जमीन को बेचकर मजदूरों को भुगतान करें। पिछले 13 साल से मिल की जमीन को बेचने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन जमीन अब तक नहीं बिक सकी। बकाया पैसा नहीं मिलने से मजदूर परेशान हैं।

हुकमचंद मिल के मजदूर भटक रहे हैं 30 साल से

नगर निगम और शासन नए हथकंडे अपनाकर न्यायालय को गुमराह करते हुए प्रकरण को लंबा कर रहे हैं। इसके चलते मिल मजदूरों का सरकार के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है। धालीवाल ने बताया कि मिल गेट पर हुई साप्ताहिक बैठक में तय हुआ है, कि मजदूर अब सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे। आंदोलन की तारीख एवं रूपरेखा सात फरवरी की बैठक में तय की जावेगी।

12 दिसंबर 1991 को हुकमचंद मिल प्रबंधन ने अचानक मिल के गेट पर ताला लगाते हुए इसे बंद कर दिया था। उस वक्त मिल में 5895 मजदूर काम करते थे। मिल बंद होने से मजदूरों का भुगतान अटक गया। उन्हें तनख्वाह तक नहीं मिली। 13 साल पहले 2007 में हाई कोर्ट ने मजदूरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश दिया था कि मिल की जमीन बेचकर भुगतान किया जाए, लेकिन जमीन आज तक नहीं बिक सकी।

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Rama Yadav

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