ऐसा लगता है कि मानो शासन एवं शराब दोनों ही ठेकेदारों के कब्जे में है

MMD न्यूज़, अमन वर्मा/ धार (सरदारपुर) : प्रदेश सरकार अवैध शराब पर शिकंजा कसने के दावे भले ही कितने कर ले, लेकिन शराब माफिया की ताकत को बढ़ने से कोई रोक नहीं पाया है। प्रदेश में दोगुनी ताकत से अवैध शराब का कारोबार फैल रहा है। पिछले पांच साल की स्थिति देखें तो अवैध शराब का खेल पांच गुना बढ़ गया है।

लाइसेंसी दुकानों की आड़ में कर रहे हैं शराब का अवैध गोरखधंधा। जिला मुख्यालय से मात्र 40 से 45 किलोमीटर की दूरी पर तहसील मुख्यालय सरदारपुर इन दिनों शराब माफियाओं के अवैध कारोबार को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है कभी दुकानों के स्थानों को लेकर या फिर नियमों को लेकर हमेशा चर्चा का विषय रहा। जबकि तहसील मुख्यालय पर आबकारी अधिकारी सहित तमाम अधिकारियों के मुख्यालय विराजमान है।

प्रदेश सरकार अवैध शराब पर ठेकेदारों-माफिया की ताकत को बढ़ने से कोई रोक नहीं पाया है

यहां तक कि विधायक का ग्रह क्षेत्र भी मौजूद हैसूत्रों के अनुसार माने तो सरदारपुर में 2 दुकानें लाइसेंसी होकर देशी एवं विदेशी मदिरा दुकान में उपस्थित है वही सरदारपुर तहसील में करीब 95 पंचायतों का एरिया लगता है। लाइसेंसी दुकाने बाबा फ्रूट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम से जानी जाती है । सूत्र के अनुसार शराब ठेकेदारों द्वारा लाइसेंसी दुकानों की आड़ में सरदारपुर तहसील में करीब-करीब ग्रामीण क्षेत्रों एवं मजरों में। अपने वाहनों द्वारा शराब भरकर बेरोकटोक के नियम एवं कानूनों को ताक में रखकर रोजाना ग्रामीण क्षेत्र एवं मजरों तब शराब पहुंचाई जाती है एवं उनकी डायरिया बनाई जाती है।

शराब माफियाओं द्वारा बिना रोक-टोक बेखौफ होकर शराब वाहनों में भरकर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया जाता है।

महीने में कितना माल शराब माफियाओं द्वारा, बिना रोक-टोक के बेखौफ होकर दमकता के साथ वाहनों में भरकर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया जाता है भारी भरकम राशि के सामने अधिकारियों का चुप रहना कोई आश्चर्य की बात नहीं है वहीं दूसरी ओर अबकारी के अधिकारी एवं कर्मचारी.. मुखबिर की सूचना के अनुसार दबिश डालकर इतिश्री कर लेते हैं लेकिन इन शराब माफियाओं की गाड़ियों को पकड़ने का शायद साहस नहीं होता है।

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आबकारी और पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है, लेकिन हकीकत पीछे आबकारी-पुलिस और आगे शराब माफिया वाली ही है। वर्ष 2018-19 में मप्र में 4 लाख 79 हजार लीटर अवैध शराब पकड़ी गई थी और 2019-20 में 9 लाख 87 हजार लीटर अवैध शराब को जब्त किया गया है।

एक ही साल में अवैध शराब का कारोबार दोगुना हो गया। वहीं लाहन भी इस वर्ष 8 लाख किलो ज्यादा जब्त हुआ। स्प्रिट के आंकड़े भी चार गुना उछाल मार चुके हैं। ज्ञात हो कि उज्जैन में जहरीली शराब के सेवन से 14 लोगों की मौत होने के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है।

मुख्यमंत्री ने शराब ठेकेदारों एवं शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों

मुख्यमंत्री ने शराब ठेकेदारों एवं शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों को आड़े हाथ लिया था वही अब आदिवासी बहुल क्षेत्र में ठेकेदारों द्वारा या किसी और ग्रुप के द्वारा अवैध शराब परोसी जा रही है।विगत दिनों पहले उज्जैन में जहरीली शराब से एक बड़ा हादसा हो चुका है। क्या मुख्यमंत्री जी तभी इन शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? या फिर किसी बड़े हादसा का इंतजार करेंगे। जब सरदारपुर मुख्यालय पर आबकारी अधिकारी मैडम जी से चर्चा करनी चाहिए तो, बड़े बड़े अधिकारियों का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया जाता हे। ऐसा लगता है कि मानो शासन एवं शराब दोनों ही ठेकेदारों के कब्जे में है

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Aman Verma

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